Lyrics of kumar vishwas. For For Fans Of Kumar Viswas And For Volunteer: Lyrics Of Kumar Viswas Patriotic Poem

Kumar Vishwas Poems

Lyrics of kumar vishwas

हमारे भाल पर तकदीर ने ये लिख दिया जैसे! कितनी दिवाली गयी, कितने दशहरे बीते, इन मुंडेरों पर कोई दीप न धरने आया…!! Ye Dil Barbaad Karke Su Mein Kyun Abaad Rehte Ho Koi Kal Keh Raha Tha Tum Allahabad Rehte Ho Ye Kaisi Shohratein Mujhko Ata Kar Di Mere Maula Main Sabh Kuch Bhool Jaata Hoon Magar Tum Yaad Rehte Ho 2. Kumar Vishwas Ki Shayari Ek Pahade Sa Meri Ungliyo Pe Thehra Hai, Teri Chupi Ka Sabab Kya Hai Ise Hal Kar De, Ye Faqt Lafj Hai To Rok De Rasta Inn Ka, Aur Agar Sach Hai To Baat Muqamal Kar De. सब अपने दिल के राजा है, सबकी कोई रानी है, भले प्रकाशित हो न हो पर सबकी कोई कहानी है. ये कैसे शोहरते मुझे अता कर दी मेरे मौला में सब कुछ भूल जाता हु मगर तुम याद रहते हो. जिनको हासिल नहीं वो जान देते रहते है, जिनको मिल जॉन वो सस्ता समझने लगते है…!! Degree College, Pilkhuwa affiliated to Chaudhary Charan Singh University, Meerut and his mother Smt. हमारे सामने है और हमारे बाद हंगामा!! राह-ए-दुनिया में मुझे कोई भी दुश्वारी नहीं. In order to post comments, please make sure JavaScript and Cookies are enabled, and reload the page.

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Dr. Kumar Vishwas New Song 2020

Lyrics of kumar vishwas

कलम को खून में खुद के डुबोता हूँ तो हंगामा गिरेबां अपना आंसू में भिगोता हूँ तो हंगामा नही मुझ पर भी जो खुद की खबर वो है जमाने पर मैं हंसता हूँ तो हंगामा, मैं रोता हूँ तो हंगामा. यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता!! Koi Deewana Kehta Hai कोई दीवाना कहता है कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है! Hindi Shayari by Kumar Vishwas Aankhein ki chat pe tehalte rahe kaale saaye, Koi pahlo me ujale bharne nahi aaya, Kitni diwali gayi, kitne dashare beete, In munderon par koi deep na dharne aaya. कुमार विश्वास शायरी डाउनलोड अगर आप kumar vishwas new shayari 2015, 2015, kumar viswas shayri, kumar vishvas shayri in mp3, 2012, kumar vishwas latest 2015 shayri, dr kumar vishwas latest 2013 shayari, mp3 download 2015, song mp3, kumar vishwas 2 lines shayari, kumar vishvas shayri, kumar vishwas 2 line shayari, kumar vishwas 2015 shayri, kumar vishwas new shayari 2013 के बारे में जानना चाहे तो यहाँ से जान सकते है : उम्मीदों का फटा पैरहन, रोज़-रोज़ सिलना पड़ता है, तुम से मिलने की कोशिश में, किस-किस से मिलना पड़ता है कलम को खून में खुद के डुबोता हूँ तो हंगामा गिरेबां अपना आंसू में भिगोता हूँ तो हंगामा नही मुझ पर भी जो खुद की खबर वो है जमाने पर मैं हंसता हूँ तो हंगामा, मैं रोता हूँ तो हंगामा. मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा!! ये हंगामे की रातें हैं या है रातों का हंगामा!! मैं उससे दूर था तो शोर था साजिश है , साजिश है! He started his schooling from Lala Ganga Sahay School, Pilkhuwa where he spent a part of his childhood. हमने दुःख के महासिंधु से सुख का मोती बीना है और उदासी के पंजों से हँसने का सुख छीना है मान और सम्मान हमें ये याद दिलाते है पल पल भीतर भीतर मरना है पर बाहर बाहर जीना है। मै तेरा ख्वाब जी लून पर लाचारी है, मेरा गुरूर मेरी ख्वाहिसों पे भरी है…! जिनको हासिल नहीं वो जान देते रहते है, जिनको मिल जॉन वो सस्ता समझने लगते है…!! Kumar Vishwas Poem in Hindi Koi Deewana Kehta hai, Koi Pagal Samjhta Hai Kumar Vishwas Poem in Hindi, Kumar Vishwas Shayari in Hindi, koi deewana kehta hai poem in Hindi.

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Kumar Vishwas

Lyrics of kumar vishwas

कभी तुमसे थी जो वो ही शिकायत हे ज़माने से मेरी तारीफ़ करता है मोहब्बत क्यों नहीं करता. मेरा महताब उसकी रात के आगोश में पिघले. Ye tera dil samjhata hai ya mera dil samjhata hai … Is kavita par to bahot taliyan milti hai sir. अभी तक डूबकर सुनते थे सब किस्सा मुहब्बत का! मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है!! Kumar ji, English is neither a language of the untouchables nor a difficult one. जब आता है जीवन में खयालातों का हंगामा हास्य बातो या जज़्बातो मुलाकातों का हंगामा जवानी के क़यामत दौर में ये सोचते है सब ये हंगामे की राते है या है रातो का हंगामा मिले हर जख्म को मुस्कान को सीना नहीं आया अमरता चाहते थे पर ज़हर पीना नहीं आया तुम्हारी और मेरी दस्ता में फर्क इतना है मुझे मरना नहीं आया तुम्हे जीना नहीं आया वो जिसका तीरे छुपके से जिगर के पार होता है वो कोई गैर क्या अपना ही रिश्तेदार होता है किसी से अपने दिल की बात तू कहना ना भूले से यहां खत भी जरा सी देर में अखबार होता है। कोई खामोश है इतना बहाने भूल आया हु किसी की एक तरन्नुम में तराने भूल आया हु मेरी अब राह मत ताकना कभी ऐ आसमा वालो में एक चिड़िआ की आँखों में उड़ाने भूल आया हु.

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Kumar Vishwas Poems

Lyrics of kumar vishwas

Rama Sharma is a home maker. While their words have become immortal, transcending decades, we haven't really come across many poets who describe love and heartbreak the way this generation feels it. Kumar Vishwas Romantic Shayari mehfil-mehfil muskana to padta hai, khud hi khud ko samjhana to padta hai, unki aankho se hokar dil jana, raste me ye maikhana to padta hai. . रस्ते में ये मैखाना तो पड़ता है. Hamare Sher Sun Kar Bhi Jo Khamosh Itna Hai Khuda Jaane Guroor-e-Husn Mein Madhosh Kitna Hai Kisi Pyale Se Poocha Hai Suraahi Main Sabab Mein Ka Jo Khud Behosh Ho Wo Kya Bataye Ke Hosh Kitna Hai 1. Kalam ko khhon me khud ke dubota hoon to hangama, Girebaan apnaa aansu me bhingota hoon to hangama, Nahi mujh par bhi jo khud ki khabar wo hai jamane par, Main hansta hoon to hangama, main rota hoon to hangama.

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कुमार विश्वास

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में तेरी ज़ुल्फ़ के पेंचो से हो के निकला हूँ. सुबह के सुर्ख उजालों से तेरी मांग से, मेरे सामने तो ये श्याह रात सारी है…. Didi Kahti Hain Us Pagli Ladki Ki Kuchh Aukat Nahin, Uske Dil Mein Bhaiya Tere Jaise Pyare Jasbat Nahin, Woh Pagli Ladki Nau Din Mere Liye Bhooki Rahti Hai, Chup-Chup Saare Vrat Karti Hai, Par Mujhse Kabhi Na Kahti Hai, Jo Pagli Ladki Kahti Hai, Main Pyar Tumhi Se Karti Hoon, Lekin Mein Hoon Majboor Bahut, Amma-Baba Se Darti Hoon, Us Pagli Ladki Par Apna Kuchh Adhikar Nahin Baba, Yeh Katha-Kahani Kisse Hain, Kuchh Bhi To Saar Nahin Baba, Bas Us Pagli Ladki Ke Sang Jeena Fulwari Lagta Hai, Aur Us Pagli Ladki Ke Bin Marna Bhi Bhari Lagta Hai. Wo Jiska Teer Chupke Se Jigar Ke Paar Hota Hai Wo Koi Gair Kya Apna Hi Rishtedaar Hota Hai Kise Se Apne Dil Ki Baat Tu Kehna Na Bhoole Se Yahan Khat Bhi Thodi Der Se Akhbaar Hota Har ek nadiya ke hoto pe samandar ka taraana hai, Yaha farhaad ke aage sada koi bahana hai…! तुम्ही पे मरता है ये दिल अदावत क्यों नहीं करता कई जन्मो से बंदी है बगावत क्यों नहीं करता. . मेरे जुम्लूं से काम लेते हैं वो, बंद है जिनसे बोलचाल मेरी…!! में उसकी नींद में जागूँ वो मुझमे घुल के सो जाये. A professor of Hindi Literature should be internationally connected, not only in known circles, but also in strange and alien ones.

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कुमार विश्वास

Lyrics of kumar vishwas

हम न कहते थे प्यार मत करना…!! नज़र में शोखिया लब पर मुहब्बत का तराना है मेरी उम्मीद की जद़ में अभी सारा जमाना है कई जीते है दिल के देश पर मालूम है मुझकों सिकन्दर हूं मुझे इक रोज खाली हाथ जाना है। मै तेरा ख्वाब जी लून पर लाचारी है, मेरा गुरूर मेरी ख्वाहिसों पे भरी है…! वही बातें पुरानी थीं, वही किस्सा पुराना है, तुम्हारे और मेरे बिच में फिर से जमाना है…!! एक दो रोज में हर आँखें उब्ब जाती है, मुझको मंजिल नहीं रास्ता समझने लगते है…! Jab Aata Hai Jeevan Mein Halaaton Ka Hungama Jazbaton, Mulakaton, Haseen Baaton Ka Hungama Jawani Ke Qayamat Daur Mein Ye Soch Te Hain Sabh Ye Hungame Ki Raatein Hain Ya Raaton Ka Hungama. I know your poems are highly popular in Hindi belts. Nazar me sokhiya lab par mohabbat ka fasana hai, meri ummeed ki zad me abhi sara zamana hai, kai jeete hai dil ke desh par maloom hai mujhko, sikandar hoon mujhe ek roz khaali haath jaana hai. जिस्म का आखिरी मेहमान बना बैठा हूँ एक उम्मीद का उन्वान बना बैठा हूँ वो कहाँ है ये हवाओं को भी मालूम है मगर एक बस में हूँ जो अनजान बना बैठा हूँ कितनी दुनिया है मुझे ज़िन्दगी देने वाली और एक ख्वाब है तेरा की जो मर जाता है खुद को तरतीब से जोड़ूँ तो कहा से जोड़ूँ मेरी मिट्टी में जो तू है की बिखर जाता है डाॅ कुमार विश्वास की प्रेरणादायी शायरी वो जो खुद में से कम निकलतें हैं उनके ज़हनों में बम निकलतें हैं आप में कौन-कौन रहता है हम में तो सिर्फ हम निकलते हैं। मेरे जीने में मरने में, तुम्हारा नाम आएगा मैं सांस रोक लू फिर भी, यही इलज़ाम आएगा हर एक धड़कन में जब तुम हो, तो फिर अपराध क्या मेरा अगर राधा पुकारेंगी, तो घनश्याम आएगा वो जिसका तीरे छुपके से जिगर के पार होता है वो कोई गैर क्या अपना ही रिश्तेदार होता है किसी से अपने दिल की बात तू कहना ना भूले से यहां खत भी जरा सी देर में अखबार होता है। मिल गया था जो मुक़द्दर वो खो के निकला हूँ. Currently you have JavaScript disabled. ये जज्बातों, मुलाकातों हंसी रातों का हंगामा!! पुकारे आँख में चढ़कर तो खू को खू समझता है अँधेरा किसको कहते है ये बस जुगनू समझता है हमें तो चाँद तारो में तेरा ही रूप दिखता है मोहब्बत में नुमाइश को अदाए तू समझता है खुद से भी न मिल सको इतने पास मत होना इश्क़ तो करना मगर देवदास मत होना देना , चाहना , मांगना या खो देना ये सारे खेल है इनमें उदास मत होना!! यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं! When our generation came of age, we did not have iconic literary figures like Ghalib or Sahir Ludhianvi to spell love for us. दुनिया कितना अर्थ लगाए, हम दोनों को मालूम है.

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कुमार विश्वास

Lyrics of kumar vishwas

मेरा महताब उसकी रात के आगोश में पिघले. मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले! Early Life and Education Kumar Vishwas was born on 10 February 1970, in Pilkhuwa, Ghaziabad, Uttar Pradesh in a Gaur Brahmin family. बहुत सरल है किसने कितना दर्द सहा, जिसकी जितनी आँख हँसे है, उतनी पीर पुराणी है. And, among the very few is Dr. हर एक नदिया के होंठों पे समंदर का तराना है, यहाँ फरहाद के आगे सदा कोई बहाना है! Please submit your comment with a real name. अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का! Comment Thanks for your feedback! Kumar Vishwas birth on 10th February 1970 in Ghaziabad, Uttar Pradesh.

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